योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने नौकरी छोड़ योग के लिए जीवन किया समर्पित

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मोनू कुमार, पटना: आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अपने शरीर पर ध्यान नहीं देते। लेट नाइट पार्टिज, जंक फूड, देर से सोने और जागने के कारण हमारा शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। ऐसे में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग एक महत्वपूर्ण तरीका है। अहमदाबाद स्थित वशिष्ठ योग फांउडेशन ट्रस्ट के संस्थापक योगगुरु धीरज वशिष्ठ की कहानी कुछ ऐसी ही है। भारतीय जनसंचार संस्था से पढ़ाई करने के बाद धीरज दिल्ली में न्यूज चैनल में कार्यरत थे। इस बीच उन्हें यह एहसास हुआ कि काम में व्यस्तता के कारण उनके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।  इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपना जीवन योग को समर्पित कर दिया।

शुरुआत

द बेटर बिहार” से बात करते हुए 41 वर्षीय योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने कहा कि, “खबरों की दुनिया में मैं खुद की खबर नहीं ले पा रहा था। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ योग को अपनाने का फैसला किया। देश के अलग-अलग स्थानों के भ्रमण के दौरान मैं गुजरात पहुंचा। अहमदाबाद में मुझे लगा कि यहां बहुत शांति है और यहीं से मुझे शुरुआत करनी चाहिए। फिर मई 2011 में मैंने वशिष्ठ योग फांउडेशन ट्रस्ट की स्थापना की।“

वशिष्ठ योग फांउडेशन ट्रस्ट का उद्देश्य

फांउडेशन के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताते हुए योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने बताया कि, “आज के समय में कई योग सिखाने वाले प्रशिक्षक कैलोरी बर्न के नाम पर योग को जल्दी-जल्दी करा रहे हैं। योग को पर्याप्त समय देकर धीरे-धीरे करना होता है। इसका जो मूल, प्राचीन और वास्तविक स्वरूप है वो गायब हो गया है। शास्र के उलट अब योग करने के तरीके को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसका फायदा तभी होता है जब इसे प्राचीन प्रारूप में किया जाया। योग के सबसे प्राचीन ग्रंथ योग वशिष्ठ को आधार बनाकर योग की सच्ची सीख को आम जन तक पहुंचाना ही हमारा उद्देश्य है। इसके लिए हम बिहार के भागलपुर, छत्तीसगढ़ समेत कई शहरों में नि:शुल्क कैंप चला रहे हैं।

कोरोना से लड़ाई में योग कारगर

योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने कहा कि, “कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए और योग यही करता हैं। शास्र में लिखा है योगो भवति दुखह: यानि योग दु:ख दूर करता है। भारत सरकार के आयुष विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश में भी तीस मिनट योग करने की सलाह दी गई है।” पूर्व मर्चेंट नेवी कैप्टन अश्विनी गर्ग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बतलाया कि, “अश्विनी चार बार कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद उन्होंने योग करना शुरु किया और वे ठीक हो गए। कोरोना वायरस हमारे फेफड़े को प्रभावित करता है जिससे श्वास लेने में दिक्कत होती है और योग इसमें कारगर है।”

मेट्रो में रहने वाले लोग करें योग

शहरों में रहने वाले लोग जो अपने काम में व्यस्त रहते हैं। उनके बारे में योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने कहा कि, “जो भी व्यक्ति अपने व्यापार और करियर में अच्छा करना चाहते हैं उन्हें रोज योग करना चाहिए क्योंकि व्यक्ति का स्वास्थ्य ही सबकुछ के केंद्र में हैं। योग को सही तरह से समझें और इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाए। इसके नियमित अभ्यास से हम कई बीमारियों को अपने शरीर से दूर रख सकते हैं।”

धीरज वशिष्ठ की पुस्तक

योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने पेंग्विन प्रकाशन के लिए योग पर एक पुस्तक लिखी है। जो अक्टूबर में बाज़ार में उपलब्ध होगी। अपनी इस पुस्तक के बारे में उन्होंने बताया कि, “आज के समय में कई लोग योग कर रहे हैं लेकिन फिर भी बीमारियां हो रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग सही तरीके से योग नहीं कर रहे हैं। योग का एक प्रारूप होता है। अलग-अलग आसन करते समय कई बातों को ध्यान में रखना पड़ता है। योग के चिकित्सिय रूप और दार्शनिक विवेचना को सरल शब्दों में बताना आज की जरूरत है। इसलिए मैंने इस पुस्तक को लिखने का प्रस्ताव स्वीकार किया।”

आज के युवाओं के लिए संदेश

इस पर योगगुरु धीरज वशिष्ठ ने कहा कि, “आज के युवा इंटेरनेट का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा कर रहे हैं और गैर जरूरी कार्यों में संलिप्त हैं। वे सतर्क होकर अपने विवेक और बुद्धि से विभिन्न सोशल मीडिया का उपयोग करें। जीवन और सोशल मीडिया के बीच में एक संतुलन बनाएं।” विशेष रूप से बिहार के युवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, “बिहार एक महान भूमि है। यहां बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह और अशोक ने जन्म लिया है। लेकिन अब राज्य की छवि धूमिल हो रही है। इसे सुधारने के लिए युवाओं को अपने हाथ में कमान लेनी होगी। युवा सिर्फ सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागे। अपने देश, राज्य और समाज के विकास में कैसे योगदान कर सकते हैं इस पर भी विचार करें।”

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अवार्ड

योग को ही अपने जिंदगी का उद्देश्य बना चुके योगगुरु धीरज वशिष्ठ को इस वर्ष भारतीय जनसंचार संस्थान द्वारा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उनके यू ट्यूब चैनल “योगगुरु धीरज” को पांच लाख से अधिक लोगों ने सब्सक्राइब किया है।

निजी ज़िंदगी

योगगुरु धीरज वशिष्ठ मूल रुप से बिहार के भागलपुर जिले के बरारी गांव के रहने वाले है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई उन्होंने भागलपुर से ही की है। इसके बाद दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार  संस्थान से रेडियो और टेलीविजन पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा करने के बाद न्यूज चैनल से जुड़े। नौकरी छोड़ योग अपनाने के फैसले में उनके परिवार ने उनका साथ दिया। आज योगगुरु धीरज वशिष्ठ योग की दुनिया में एक जाना माना नाम है और लाखों लोगों तक योग को पहुंचा रहे है।

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