यूनिसेफ- SMNeT की टीम कर रही कोविड के संदिग्ध मरीजों की पहचान, रेफ्यूजल के मामलों को किया जा दूर

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अब तक 1.82 करोड़  से ज्यादा घरों  और 10.1 करोड़ लोगों का हुआ है सर्वेक्षण

कोरोना वायरस के मरीजों को डिटेक्ट करने के लिए बिहार सरकार डोर टू डोर अभियान चला रही है। यह अभियान पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तर्ज पर तैयार किया गया है । इस सर्वेक्षण को करने के लिए पूरे बिहार में 50, 397 टीम का गठन किया गया है. इसमें आशा कार्यकर्त्ता, ए एन एम और शिक्षक शामिल हैं. यूनिसेफ एसएमनेट के कोऑर्डिनेटर और विश्व स्वास्थ्य संगठन के फिल्ड मॉनिटर इस सर्वेक्षण के सहायक पर्यवेक्षण और सर्वेक्षण की गुणवत्ता में बेहतर करने में अपना सहयोग दे रहे हैं.  स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के अनुसार 7 मई 2020  तक 182,18,398 घरों का सर्वे किया जा चुका है। जिसमें 10,10,61,272 लोगों की स्क्रीनिंग हुई है । इस सर्वे के दौरान कुल 3,845  लोगों में  बुखार, सर्दी-खांसी  या कोरोना के मिलते जुलते लक्षण मिले हैं और उनका सैंपल लिया गया हैं। इनमें 419  लोग दूसरे राज्यों से आए हैं और 38 लोग विदेश से लौटे हैं । जबकि 3388 ऐसे लोग हैं जिनका कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं हैं।

समुदाय में COVID 19  के संदिग्धों के बारे में नकारात्मक सोच और भेदभाव के कारण लोग जानकारियों को छुपाते है एवं  स्वास्थ्यकर्मियों को सहयोग देने से  इंकार कर देते हैं. यूनिसेफ की सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क  (SMNet) की क्षेत्र में अच्छी उपस्थिति है। SMNet के पास रिफ्यूज़ल्स को समाप्त करने और धर्मंगुरुओं  नेताओं, स्थानीय स्तर के प्रभावशाली लोगों और जनप्रतिनिधियों  (PRI) के साथ शानदार समन्वय का बहुत बड़ा अनुभव है जिसने पोलियो उन्मूलन और पोलियो एंड गेम रणनीति के साथ ही  नियमित टीकाकरण को मजबूत करने में भी मदद की। पोलियो अभियान के अनुभवों के आधार पर यूनिसेफ SMNet बिहार , COVID महामारी में रेफ्यूजल  को तोड़ने में मदद कर रहा है.  अब तक सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क ने 26520 कुल  रेफ्यूजल मामलों में से 20,462 मामलों को कम्युनिटी मीटिंग और वन टू वन काउंसलिंग के द्वारा सुलझा लिया है.

इस पहल के बारे में बताते हुए यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ हुबे अली ने कहा कि इस पहल के माध्यम से हम इस महामारी की रोकथाम कर सकते हैं. इस सर्वेक्षण के दौरान रिफ्युज़ल वाले केस को लेकर रणनीति बना कर समुदाय को जागरूक किया जा रहा है. इस तरह के मामलों में धर्मगुरुओं का भी सहयोग लिया जा रहा है. मस्जिदों से भी माइक के माध्यम से समुदाय को सहयोग करने की अपील की जा रही है.

यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ सुश्री निपुण गुप्ता ने कहा कि जमीन पर अथक परिश्रम करने वाले सर्वेक्षण दल, दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर  काम कर रहे हैं, ये असली हीरो हैं। ये  संचार, करुणा और सहयोग के माध्यम से लोगों की सोच  को बदल रहे हैं। हमें इन लोगों के साथ कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए बल्कि अपना समर्थन और प्रार्थना करनी चाहिए.  कोविद -19 की रोकथाम और प्रबंधन में काम करने वाले,  कोविद -19 के पोजीटीव मामले वाले लोग , कोरेंटाआईंन में रहने वाले लोग , उनके साथ के घर- परिवार के लोग, इलाज के बाद नेगेटिव हो गए लोग हो या समुदाय के वो लोग जो उनको सहयोग और उनका स्वागत कर रहे हैं, वे सभी हमारे हीरो हैं!

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