रिक्शा-चालक और दिहाड़ी मजदूरों की मदद कर रहे हैं सत्यदर्शी संजय

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अदालतों के बंद होने की सूचना तुरंत ही आ गयी थी। जो बहुत जरूरी मामले थे, उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये निपटाया जा रहा था। सवारियां बंद हो गयी थीं, रिक्शा-ऑटो, निजी गाड़ियाँ जब सड़कों से गायब हुईं तो सबसे पहले तो शोर के कम होने पर ध्यान गया। घर से ही काम करना था तो पटना के शाम के ट्रैफिक की दौड़-भाग से भी छुट्टी मिली। शुरू में तो ये बड़ा सुकून भरा लगा लेकिन शाम ढलते ही एक दूसरी समस्या नजर आ गयी। आस-पड़ोस में रहने वाले कई रिक्शा-चालक और दिहाड़ी मजदूर भी थे। उनके पास अपने खाने-पकाने का शायद ही कोई इंतजाम होता था। ऐसे दर्जनों लोग छोटे टपरीनुमा होटल बंद हो जाने के बाद खायेंगे क्या?

पटना में ही पले-बढ़े सत्यदर्शी संजय को आसानी से ये लोग दिख गए। उन्हें लम्बे समय से इनका ठिकाना मालूम था। उन्होंने थोड़े साल के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने के अलावा अपना सारा समय पटना में ही बिताया था। वो कहते हैं कि पिछले करीब चालीस वर्षों में शहर बदला है, नए फ्लाईओवर बन गए हैं, लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ी है वैसे वैसे झुग्गियां भी बढ़ी हैं। इनमें रहने वाले लोग अधिकतर ऐसे लोग हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार ना मिलने की वजह से कोई काम करने पटना आ जाते हैं। अगर ये एक दो दिन ना कमायें तो इनके पास भूखे सोने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

समाज सेवा और शारीर दान जैसे संस्थानों को भी चला रहे हैं संजय

पिछले पांच वर्षों से सत्यदर्शी संजय एडिशनल सोलिसिटर जनरल हैं और बिहार में भारत सरकार के मामले देखते हैं। वर्षों से एकल विद्यालय चलाने और दधिची देहदान समिति जैसी शरीर-दान को प्रोत्साहन देने वाली संस्थाओं से जुड़े होने के कारण इन वर्गों के बीच काम करने का उनके पूरे परिवार को ही अनुभव है। उनकी पत्नी और स्वयं उन्होंने देह दान कर रखा है और लगातार लोगों से मरणोपरांत शरीर दान करने का अनुरोध भी वो दोनों करते रहते हैं। अपनी पिता के साथ वो दिव्यंगों के लिए कृत्रिम पैर जुटाने के लिए पटना-गया रोड स्थित विकलांग केंद्र से भी जुड़े रहे हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर उन्होंने तय किया कि वो कुछ लोगों को तो खाना खिला ही सकते हैं। पत्नी सुशीला अग्रवाल के साथ मिलकर उन्होंने घर में ही कुछ पैकेट बनाए और बांटना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में स्थानीय थाने से भी मदद आई और साथ ही जानकारी आई कि ऐसे कई लोग हैं जो भूखे रहने को मजबूर होंगे। अब समस्या ये थी कि बड़े स्तर पर खाना कैसे बने? ना तो उतने बड़े बर्तन थे, ना काम करने के लिए लोग! ऐसे में युवा व्यवसायी राजेश सुरेका जो कि फ्रेजर रोड में नेचर नाम से प्लास्टिक के सामान बनाने का काम करते हैं, वो सामने आये। उनकी फैक्ट्री में मजदूरों के लिए खाना बनाने की जगह थी, बर्तन थे और कुछ लोग भी मौजूद थे।

सत्यदर्शी संजय एडिशनल सोलिसिटर जनरल

इस तरह रोजाना खाना बनाने और एक हजार से अधिक पैकेट में भरने का काम शुरू हो गया। सत्यदर्शी संजय बताते हैं कि ये उनके अकेले का प्रयास नहीं। ये दर्जनों लोगों के सहयोग से पूरा हो पाया है। इस काम में और लोग व्हाट्स-एप्प ग्रुप के माध्यम से जुड़ते गए। गर्दनीबाग थाना, गर्दनीबाग के ही महिला थाना, और कोतवाली थाना में काम कर रहे पुलिसकर्मी सामने आये और उन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों की पहचान की, साथ ही उनतक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खाना पहुंचाया जाना भी सुनिश्चित किया। सामग्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंटनमेंट बोर्ड सी.ओ. सुश्री एल. हर्शल आगे आयीं। उनके साथ ही इंडियन आयल से विभास कुमार, रेलवे के कई अधिकारीगण, दैनिक भास्कर के ग्रुप चेयरमैन दीपक द्विवेदी ने भी मदद की और कोकाकोला की तरफ से सैकड़ों लीटर कोल्ड ड्रिंक उपलब्ध करवा दिया गया।

अपने अनुभव के बारे में सत्यदर्शी संजय बताते हैं कि लोगों ने बिना एहसान जताए खुले दिल से मदद की है। एक अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि नीलकमल सत्तू से मैंने कुछ सत्तू खरीदने के लिए किसी को भेजा था। जब उन्हें पता चला कि इतनी बड़ी मात्रा में सत्तू गरीबों के लिए लिया जा रहा है तो अगले ही दिन उससे दोगुना सामान बिना मूल्य कंपनी ने स्वयं ही भेज दिया। पुलिसकर्मियों के काम की वो मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हैं। विशेष तौर पर उन्होंने गर्दनीबाग महिला थाने के काम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यहाँ एसएचओ आरती जायसवाल ने अद्भुत काम किया है।

वैसे तो कहा जा सकता है कि कोरोना प्रकोप और लॉक-डाउन एक ऐसी आपदा थी, जिसके बारे में विश्व ने संभवतः सोचा भी नहीं होगा, लेकिन जिस तरह ये मानवीय पहलुओं को उजागर करता है, वो भी देखने लायक है। संकट की घड़ी में सामने आकर नेतृत्व संभाल रहे #कोरोना_वारियर्स को नमन तो रहेगा ही!

आनंद कुमार – रिसर्च और डेटा पृष्ठभूमि के आनंन्द सोशल मीडिया पर काफी सकिय हैं. इनसें anand@actionmedia.in पर संपर्क किया जा सकता है .  

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