राधा तुम किस देश से आई…

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भारत में अगर कोई सबसे बड़ा रहस्य है तो वह राधा ही है। पौराणिक इतिहास में भी राधा भूली हुई कहानी है। न जन्म का पता, न जीवन का लेकिन आधुनिक काल में हिन्दी भाषियों की जुबां पर सबसे ज्यादा राधा ही चढ़ी है। वैसे यह अच्छा है कि समाज में आदर्श प्रेम पर चर्चा हो।

भारतीय सनातन परंपरा में राधा और कृष्ण को प्रेम का दूसरा रूप माना जाता है। यानी किंवदंतियों को माने तो राधा और कृष्ण आदर्श प्रेमी रहे। उनका प्रेम इतना पवित्र था कि आज भी लोगबाग उनके प्रेम की मिसालें देते हैं। यह अलग बात है कि आज के दौर में भी ‘प्रेम’ करना सबसे बड़ा सामाजिक गुनाह है।

खैर, राधा-कृष्ण की पवित्र और आदर्शवान पे्रेम लीलाओं का वर्णन कालातीत होना ही चाहिए। और हो भी क्यों न। 8 साल के कृष्ण और 12 बरस की राधा का प्रेम रास भला कैसे मनोरम नहीं होगा।

जी हां, जब कृष्ण पहली बार राधा से मिले थे तब वे 8 साल के थे। वे अपने से चार साल बड़ी राधा को देख उस बाल्यकाल में ही प्रेममुग्ध हो गए थे। दोनों के बीच का यह प्रेम करीब चार साल तक चला। यानी बाल्यावस्था में ही कृष्ण ने यौवन की ओर बढ़ती राधा से प्रेम किया। कायदे से इसे ‘गोरतारी प्रेमी’ भी कहा जा सकता है। यानी जो प्रेमी अपनी प्रेमिका के मुकाबले ‘कच्चा’ हो। हालांकि टीवी में जिस प्रकार से राधा-कृष्ण को दर्शाया जाता है वह छल है।

(गोरतारी – पहले बाल विवाह होता था और कई बार लडक़े की उम्र लडक़ी से काफी कम रहती थी। उसे पूरब के राज्यों में गोरतारी दूल्हा कहा गया। एक भोजपुरी गाना है – ‘सैंया मिलल लडक़इया मई का करूं’ यह उसी गोरतारी दूल्हे को कहा गया है)

ऐसा नहीं है कि उस समय भी इनके प्रेम को सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। एक पौराणिक कथा के अनुसार राधा १६ बरस की थी और कृष्ण १२ साल के हो गए थे तब राधा-कृष्ण के प्रेम की यह कहानी जब राधा के परिवार तक पहुंची, तो उन्होंने राधा को घर में कैद कर दिया। क्योंकि राधा की मंगनी हो चुकी थी। श्रीकृष्ण को यह बात पता चली तो वह राधा को कैद से छुड़ाकर मां यशोदा के पास ले आए। राधा को देख यशोदा ने कृष्ण को समझाया, लल्ला राधा के साथ तेरा विवाह मेल नहीं खाता। मैं तेरा विवाह उससे भी खूबसूरत कन्या से करवा दूंगी, लेकिन श्रीकृष्ण ने कहा, मैं तो राधा से ही विवाह करूंगा। तब नंदबाबा कृष्ण को लेकर महर्षि गर्ग के पास लेकर गए। महर्षि ने उन्हें समझाया कि तुम्हारा जन्म किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए हुआ है। इसलिए सारी मोह-माया छोड़ कर अपने उद्देश्य को पूरा करो। संयोग से उसी समय कृष्ण को मथुरा का बुलावा आ गया। बहुत दु:खी मन से कृष्ण वृंदावन छोडक़र मथुरा चले गए। जाते-जाते उन्होंने राधा से वादा किया कि वे लौटकर जरूर आएंगे, लेकिन मथुरा में कंस को मारने के पश्चात श्रीकृष्ण का जीवन पूरी तरह से बदल गया और वे फिर कभी राधा से नहीं मिले।

मुझे लगता है कि राधा-कृष्ण के प्रेम को भक्तिकाल के कवियों ने भी अपनी रचनाओं में थोड़ा गौण कर दिया। शायद इसका कारण भी यही हो कि बिना विवाह के स्त्री-पुरुष के प्रेम को कैसे आदर्श कहा जाए। इसलिए भक्तिकाल के कवियों ने भी कृष्ण पर केंद्रित रचनाओं में कृष्ण के विराट व्यक्तित्व को ऐसा बना दिया जहां राधा उस विराटता में खो गई। वैसे भक्तिकाल में राधा को सबसे ज्यादा याद भी किया गया। और आज भक्तिकाल की रचनाओं से ही राधा हिन्दी पट्टी में सबसे ज्यादा चर्चा की जाती है। साथ ही, भारत की उत्सवधर्मी परंपरा में मथुरा ने इसे जीवंत रखा और वह आज भी राधे-राधे कहकर अपनी राधा को विराटता दे रहा है।

तो आज राधा अष्टमी है। राधा के अवतरण का दिन। कृष्ण के जन्म के ठीक १५ दिन बाद शुक्ल पक्ष अष्टमी को राजा वृषभानु के यहां राधा का भूमि से अवतरण हुआ था। यानी राधा भी सीता की भांति अजन्मी थी।

वैसे विविधता पूर्ण भारत को जब हम घूमते हैं तब भी राधा कृष्ण को शायद ही कोई मंदिर पश्चिम, दक्षिण और पूरबी भारत में मिले। और उत्तर में भी मथुरा को छोड़ शेष क्षेत्र में कृष्ण तो राधा के बिना ही हैं। ‘महाभारत, हरिवंशपुराण, विष्णुपुराण और पुराणों में श्रेष्ठ तथा सात्त्विक भागवतपुराण में राधा का उल्लेख तक नहीं है।’ यहां तक कि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक प्रकार की भक्तियां बताई हैं । परंतु, आजकल राधा की कृष्ण के प्रति जिस प्रेमभक्ति अथवा मधुराभक्ति के विषय में बताया जाता है, वैसी भक्ति के विषय में श्रीकृष्ण ने कुछ नहीं कहा।

इन सबके बावजूद समाज में सहिष्णुता, स्नेह और प्रेम तभी संभव है जब हम राधा-कृष्ण जैसे प्रेमी को स्वीकार करें। बिहारी ने इसलिए कहा है …

मेरी भववाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे स्याम हरित दुति होय।।
कृष्ण का रंग नीला था और राधा का सोने के समान पीला, तो राधा की पीले रंग की परछाई कृष्ण के नीले रंग पर पड़ने से वे हरे रंग के दिखाई देते हैं। दूसरा अर्थ यह भी है कि वे हरे अर्थात् प्रसन्न दिखाई पड़ते हैं।

तो हम भी प्रेम संग प्रसन्न रहें …. भले राधा किसी देश आई

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