पवन “बाहुबली” कुमार का कूआं

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हाल में ही एक फिल्म आई थी “बाहुबली” | मार-धाड़ और एक्शन से भरपूर इस फिल्म के हिट होने की कई वजहें थी | “कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा ?” वाले सवाल के लिए भी लम्बे समय से चर्चा में रही इस फिल्म के पोस्टर आपने जरूर देखे होंगे | पोस्टरों में से एक में बाहुबली एक विशालकाय शिवलिंग को कंधे पर उठाये नजर आता है |

फिल्म देखने पर पता चलता है कि वास्तव में इस दृश्य में हो क्या रहा है | बाहुबली की माँ कहीं दूर से शिवलिंग पर जल चढ़ाती थी | उन्हें बार बार पानी लाने में दिक्कत ना हो इसलिए बाहुबली शिवलिंग ही ले जा कर झरने के नीचे लगा देते हैं !

कर्णाटक के शिवमोग्गा जिले में एक गाँव है शेट्टीसारा (सागर तालुक) | वहां पवन कुमार नाम के “बाहुबली” रहते हैं | पंद्रह साल के इस “बाहुबली” की माँ को घर के लिए पानी लाने आधा-एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता था | रोज-रोज़ माँ को परेशानी होती थी | तो एक दिन जब छुट्टियाँ शुरू हुई तो पवन “बाहुबली” कुमार ने उठाया फावड़ा और कूआं खोदना शुरू कर दिया | दो हफ्ते पहले उनका कूआं तैयार हो गया है |

आगे कभी पुलिस में भर्ती होने की तमन्ना रखने वाले पवन “बाहुबली” कुमार ने अपने ही दम पर 45 फीट खोद डाला था | बीच में हाथ टूट जाने पर अप्रैल में उन्होंने दो मजदूरों की मदद भी ली | इस तरह 10 फीट और खोद कर कूआं तैयार हो गया |

अब मदर्स डे तो बीत गया है | पवन “बाहुबली” कुमार की कहानी इसलिए बताई क्योंकि कुछ बयान वीर मदर्स डे पर एक बधाई सन्देश भी नहीं देते | ऊपर से ऐसा करके सूरमा भी बन रहे थे | अब साहेब पवन “बाहुबली” कुमार की तरह, अपनी माँ के लिए, कूआं तो नहीं ही खोदा होगा आपने ? रोज़ खाना बनाने या घर की सफाई में भी मदद नहीं करते | भारतीय संस्कारों में ही पाले गए होंगे, और यहाँ “लव जू” बोला नहीं जाता | तो हर रोज़ माँ को लव जू माँ भी नहीं कहते हम लोग |

बाकी जो एक दिन का मौका मिला था, जब लव जू कह देने पर माँ खुश होती और हंस के टाल देती, वो भी मिस हो गया है | खैर, कोई बात नहीं, इस बार नहीं तो अगले साल सही | तब तक के लिए पवन “बाहुबली” कुमार की ज्जै !!

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