23 राज्यों में काम करने वाली पटना की गैर सरकारी संस्था – तरुमित्र

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मोनू कुमार, पटना: 21वीं शताब्दी में मानव जाति के सामने कई वैश्विक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी है। इन समस्याओं में से एक हैं- पर्यावरण परिवर्तन। प्रकृति के दोहन ने मनुष्य की अगली पीढ़ी की सुरक्षा पर प्रश्नवाचक चिन्ह् लगा दिया है। पूरी दुनिया में हर रोज सैकड़ों हेक्टेयर जंगल काटे जा रहे हैं। हर रोज हजारों टन प्लास्टिक कचड़ा या तो नदियों और समुद्र में डाल दिया जाता है या खुले में फेंक दिया जाता हैं। वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले काले धुएं और अपशिष्ट पदार्थों से वायु और जल प्रदूषित होता जा रहा है। और आज हम एयर प्यूरीफायर और वाटर प्यूरीफायर का उपयोग करने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में यह समय अपनी गलतियों को समझ पर्यावरण संरक्षण का है। हम सब अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव कर इसमें अपना योगदान दे सकते हैं। जैसे – पेड़ लगाकर, प्लास्टिक का उपयोग न करके, पानी बचाकर, बिजली का दुरुपयोग रोक कर।

पटना की गैर सरकारी संस्था “तरूमित्र” वर्ष 1988 से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इसकी स्थापना फादर रॉबर्ट एथिकल एसजे ने की थी। तरूमित्र का दीघा में 10 एकर क्षेत्र में एक बायोस्फेयर रिजर्व भी है जो कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त बिहार का एक मात्र बायोस्फेयर रिजर्व है।

तरूमित्र के कार्य

तरूमित्र स्कूली छात्रों के साथ मिलकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। वर्तमान में तीन लाख से अधिक छात्र इस संस्था से जुड़े हुए है। जो कि देश भर के 23 अलग-अलग राज्यों के 2,000 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों से ताल्लुक रखते हैं। तरूमित्र स्थानीय लोगों, जिला प्रशासन, नगर निगम, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर ग्रीन कवर बढ़ाने की ओर काम करता है। जब भी सार्वजनिक स्थानों पर पेड़ काटे जाते है या कोई ऐसा फैसला लिया जाता है जिससे प्रदूषण बढ़े तो तरूमित्र के सदस्य रोड शो, ह्यूमन चेन, हस्ताक्षर अभियान और नुक्कड़ नाटक के जरिए अपना विरोध जताते हैं।

तरूमित्र आश्रम

पटना के दीघा में तरूमित्र का एक आश्रम है जहां एक हजार से अधिक दुर्लभ प्रजाति के पौधे है। ये सभी विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसलिए यहां इन्हें संरक्षित किया जाता है। यह बायोस्फेयर रिजर्व लगभग 10 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। यहां आॅर्गेनिक तरीके से चावल और सब्जियां उपजाई जाती है। यह संस्था ऊर्जा के अन्य स्त्रोतों, आर्गेनिक फार्मिंग और गार्डेनिंग, इको फ्रेंडली गतिविधियां, वर्मी कंपोस्टिंग, कचड़ा प्रबंधन और अन्य वैसे कार्य करती है जिससे कार्बन को कम किया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्पेशल स्टेटस

तरूमित्र को वर्ष 2005 में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद् के तरफ से स्पेशल कंसलटिव स्टेटस मिला था। इस स्टेटस के कारण तरूमित्र संयुक्त राष्ट्र द्वारा सतत् विकास पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग ले सकता है।

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