इस संकट की घड़ी में देश के सभी लोगों को आगे आना चाहिए – डॉ. निक्की हेम्ब्रम

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भारत में कोरोना वायरस (सीओवीआईडी-19) के कहर को देखते हुए लॉक-डाउन आज पांचवे दिन भी जारी है। इसका असर गरीब परिवारों पर विशेष रूप से पड़ रहा है। दहाड़ी मजदूर, रिक्शा-चालक, ठेले इत्यादि के सहारे जीवन यापन करने वाले वैसे लोग जो हर रोज कमाकर खाने पर निर्भर हैं, उन्हें अधिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। बाहर जाने पर जहाँ उन्हें कोरोना से खतरा है, वहीँ उन्हें ये भी लग रहा है कि काम ना करने पर कहीं उन्हें भूख ना मार डाले।

इस विकट स्थिति से निपटने के लिए संस्थाएं तो सामने आ ही रही हैं, साथ ही लोग व्यक्तिगत स्टार पर भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं पौध संरक्षण एवं कृषक अधिकार, कृषि मंत्रालय की सदस्य डॉ. निक्की हेम्ब्रम भी मदद के लिए आगे आयीं। उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में पचास हजार (50,000) रूपए का दान दिया है।

इस सिलसिले में बात करते हुए डॉ. हेम्ब्रम ने बताया कि वो भागलपुर के बांका क्षेत्र से आती हैं और उन्होंने अभाव को करीब से देखा है। उनके अनुसार आदिवासी समुदायों में जरूरतें ही कम होती है और गाँधी जी के अपरिग्रह के सिद्धांत जैसा ही वो बहुत ज्यादा बचा कर रखने में विश्वास नहीं रखते। ऐसे में हो सकता है कि इस संकट की घड़ी में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हो। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार मजबूती से इस आपदा से निपट रही है और बिहार की नागरिक होने के कारण उन्होंने सरकार की मदद नहीं की बल्कि केवल अपना कर्तव्य निभाया है।

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