गीतकार राज शेखर का मधेपुरा से मुंबई तक का सफ़र

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मोनू कुमार, पटना: अक्सर जो हम सोचते या चाहते हैं वो नहीं होता और जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं होता है वो हमारे साथ हो जाता हैं। “तनु वेड्स मनु” फिल्म से गीतलेखन की शुरूआत करने वाले राज शेखर की कहानी कुछ ऐसी ही है। बिहार के मधेपुरा जिले के मूल निवासी राज शेखर मायानगरी मुंबई अपने दोस्तों के कहने पे गए थे। हालांकि कॉलेज के दिनों में वे नियमित रूप से नाटक करते रहते थे और इस दौरान उन्होंने बेस्ट एक्टर और बेस्ट डायरेक्टर समेत ढे़रों पुरस्कार जीते। और फिर मुंबई गए तो ऐसे गए कि वहीं के हो के रह गए।

शुरूआती जीवन

बिहार के हर दूसरे माता-पिता की तरह राज शेखर के माता-पिता भी चाहते थे कि वे इंजीनियरिंग करें। दसवीं के बाद इंजीनियरिंग इंट्रेस परीक्षा की तैयारी करने के लिए कोचिंग ज्वाइन किया। मगर यह पढ़ाई उन्हें ज्यादा दिनों तक रास नहीं आई और कुछ ही महीनों में उन्होंने इंजिनियरिंग इंट्रेंस परीक्षा की तैयारी करना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में बीए और एमए किया।

मुंबई का सफर

“द बेटर बिहार” से बात करते हुए राज शेखर ने बताया कि एमए करने के बाद, अपने दोस्तों के साथ वो मुंबई चले गए। मुंबई में उन्होंने एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू किया। फिल्म तनु वेड्स मनु के डायरेक्टर आनंद एल राय को असिस्ट कर रहे राज शेखर को एक दिन आनंद ने कहा कि, “तुम कविताएं अच्छी लिखते हो, गाना लिखना चाहते हो?” राज शेखर ने उनकी बात मान ली और फिल्म के लिए गाना लिखा। गाने के बोल डायरेक्टर को पसंद आ गए और राज शेखर पर गीतकार का ठप्पा लग गया। बस तो क्या था, इसके बाद उन्होंने जो गाने लिखने शुरू किए फिर एक के बाद एक कई फिल्मों के लिए उन्होंने गीत लिखे। जिनमें कुछ प्रमुख हैं – तनु वेड्स मनु रिटर्नस्, उरी द सर्जिकल स्ट्राइक, तुम्बाद, क़रीब क़रीब सिंगल, हिचकी, सांढ़ की आंख।

गाने लिखने में चुनौतियां

कोई ऐसा गाना जिसे लिखने में सामान्य से ज्यादा समय लगा हो के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि, “हिचकी फिल्म का गाना मैडमजी गो इजी…., और तनु वेड्स मनु का ओ साथी रे … ये दो ऐसे गाने रहे लिखने में ज्यादा समय लगा.” आगे उन्होंने बताया कि एक गाना कभी कुछ घंटों में पूरा हो जाता है तो कभी किसी गाने में कई दिन भी लग जाते हैं। जैसे तनु वेड्स मनु रिटर्नस् फिल्म का गाना घनी बावरी को लिखने में सिर्फ दो घंटे लगे थे।

इरफ़ान खान के साथ यादें

अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इस दुनिया को अलविदा कहने वाले बॉलिवुड अभिनेता इरफ़ान खान के साथ शेखर ने फिल्म क़रीब क़रीब सिंगल की थी। इस फिल्म में उनके द्वारा लिखे गए ‘जाने दे..’ गाने को लोगों ने काफी पसंद किया था। इरफ़ान के साथ बिताए गए समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि, “इरफ़ान बहुत खूबसूरत दिल के इंसान थे। उनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा। वो ज़मीन से जुड़े हुए व्यक्ति थे। वो अपने काम के प्रति हमेशा संजीदा रहते थे लेकिन कभी-कभी  मजाकिया भी हो जाते थे।”

राजनीति पे रखते है करीब से नज़र

हिन्दी काव्य सम्मान पुरस्कार से सम्मानित हो चुके राज शेखर राजनीति पर बड़ी करीब से नज़र बनाए रखते है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति को कैसे देखते है के सवाल पर उन्होंने कहा कि, “बिहार की अभी जो स्थिति है उस पर हम सभी को सोचने होगा और अगले 15-20 वर्षों में हम कैसा बिहार चाहते है। इस पर विचार करना होगा। बिहार में उर्वर ज़मीन है, बिहार के लोग दूसरे जगहों पर जाकर अच्छा कार्य कर रहे हैं। फिर भी हमारे यहां कुपोषण ज्यादा है, क्राइम ज्यादा है, समाज में जातिवाद है। इन सब को सुधार कर बिहार में बदलाव लाने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा। यही सारी चीजें बिहार की राजनीति की दशा और दिशा तय करेगी।” दुबई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, “एक निर्जन मरूस्थल को वहां के लोगों ने स्वर्ग बना दिया हैं। वहां मीठे पानी का स्त्रोत नहीं है, उपजाऊ भूमि नहीं है। फिर भी उन लोगों ने एक खूबसूरत देश बसा लिया है। अगर वो कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं।”

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