केबीसी विजेता सुशील कुमार पर्यावरण के लिए कर रहे कार्य

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पटना, मोनू कुमार : बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में हर सुबह एक व्यक्ति थैलियों में चंपा के पौधे लेकर अपने घर से निकलता है। वह घर-घर जाकर लोगों को एक चंपा का पौधा अपने घर के बाहर लगाने का आग्रह करता है। वह ऐसा पिछले दो वर्षों से करता आ रहा है। यह व्यक्ति किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हम बात कर रहे हैं कौन बनेगा करोड़पति में पांच करोड़ रुपए जीतने वाले सुशील कुमार की।

2011 में कौन बनेगा करोड़पति सीजन – 5 में पांच करोड़ रुपये जीतने वाले सुशील कुमार की छवि हमारे दिमाग में भले ही धूमिल हो गई हो। लेकिन सुशील पर्यावरण के प्रति अपने कार्यों को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पे छाए हुए है। ‘द बेटर बिहार’ से बात करते हुए सुशील ने बताया कि वे पिछले दो सालों से शहर में चंपा के पौधे लगा रहे है। पौधे के अलावे, सुशील गोरैया संरक्षण के लिए भी कार्य कर रहे है।

चंपा से चंपारण

36 वर्षीय सुशील ने 2018 में ‘चंपा से चंपारण’अभियान की शुरूआत की थी। इसके तहत पहला पौधा मशहूर समाजसेविका मेधा पाटेकर ने एक स्थानीय स्कूल में लगाया था। तब से सुशील कुमार अभी तक एक लाख से अधिक चंपा के पौधे लगा चुके है। इसके अलावा सुशील ने पांच सौ से अधिक बरगद, नीम, पाकड़ और पीपल के पौधे भी लगाए है।

सुशील कहते है कि चंपा का पौधा लगाने के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होती। इसे हम घर में, स्कूल में आसानी से लगा सकते हैं। पीपल का वृक्ष विशाल होता है। इसके लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है। इसलिए मैं चंपा के पौधे ज्यादा लगाता हूं। स्कूल में प्राचार्य से बातकर वहां पौधे लगाते हैं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी उस स्कूल की ही होती है।

शुरूआत कैसे हुई

सुशील के पास एक जमीन पड़ी थी जिस पर उनके पिता ने चंपा का पौधा लगाने को कहा था। क्योंकि चंपारण का पुराना नाम चंपकारण्य था जो कि चंपा के नाम पर पड़ा था। इसी से प्रेरणा लेते हुए सुशील ने घर-घर चंपा का पौधा लगाने की शुरूआत की। सुशील ने कहा कि, “2018 में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 21,000 पौधे लगाए थे। इसी प्रकार धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और इस कार्यक्रम की बातें पूरे शहर में होने लगी। अगले वर्ष 2019 में मार्च में हमने गोरैया संरक्षण की शुरूआत की। यह छोटी सी चिड़िया अब बहुत ही कम नजर आती है। इसलिए सुशील गोरैया के घोंसलें खरीद लोगों को बांटते है और उनसे घोंसलें को अपने घर की छत या बालकनी पर रखने को कहते हैं। सुशील बताते है कि एक घोंसला की कीमत तकरीबन एक सौ पचास रुपये होती है। अभी तक वे पांच सौ से ज्यादा घोंसलें बांट चुके है और सभी में गोरैया रह रही हैं।

फण्ड

इन कार्यों के लिए सुशील अपने जेब से ही खर्च करते हैं. वो  बताते है कि पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग भी इस कार्य के लिए आर्थिक रूप से या पौधे देकर सहयोग करते है।

सुशील की जिंदगी

सुशील ज्वाइंट फैमिली में रहते है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी के अलावा पिता, माता और पांच भाई है। सुशील कला से भी जुड़े हुए है और सितार बजाते है। उनकी इच्छा है कि वे एक दिन स्टेज परफार्मेंस करें। सुशील ने कहा कि “अपने गुरू के मार्गदर्शन में रियाज कर रहा हूं और उम्मीद है कि अगले वर्ष स्टेज परफार्मेंस दूंगा।”

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