दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में 70 से अधिक विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

0
153

पटना 26 जुलाई 2020
“आत्मनिर्भरता को सही अर्थों में समझने की ज़रूरत है. मीडियाकर्मियों द्वारा आम जनमानस के लिए इसकी सही व्याख्या नितांत आवश्यक है ताकि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को गति मिले.” द हिन्दू बिज़नेस लाइन के वरिष्ठ उपसंपादक श्री शिशिर सिन्हा ने युनिसेफ़ के सहयोग से एमिटी स्कूल ऑफ़ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी, पटना द्वारा ‘बिल्डिंग ए सेल्फ़-रिलायंट इंडिया- रोल ऑफ़ मीडिया (अवेयरनेस, ट्रेंड्स, चैलेंजेज एंड प्रॉस्पेक्टस)’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में उक्त बातें कहीं. 24-25 जुलाई को आयोजित इस वेबिनार में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों, मीडिया जगत की जानीमानी हस्तियों समेत 3 दर्ज़न से ज़्यादा शिक्षकों, शोधार्थियों और युवा विद्यार्थियों ने शिरकत की. देश-विदेश के 197 कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों से कुल 1850 लोगों ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण किया था. शोधार्थियों व प्राध्यापकों से सज्जित सीनियर श्रेणी के लिए जहां लगभग 120 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं थीं, वहीं 14-21 साल की श्रेणी में 60 स्कूलों एवं कॉलेजों से कुल 73 बच्चों-युवाओं ने अपने पेपर भेजे थे.

विभिन्न थीम पर आधारित तकनीकी सत्र
4 तकनीकी सत्रों में विभाजित इस ऑनलाइन सम्मलेन में ‘मीडिया, समाज और विकास’, ‘वर्तमान समय में न्यू मीडिया के विभिन्न आयाम’, ‘एडवोकेसी व जागरूकता को लेकर मीडिया और जन संचार की भूमिका सह चुनौतियाँ’ जैसे थीम पर अलग-अलग पेपर प्रस्तुत किए गए. कोविड महामारी की वजह से जारी लॉक डाउन ने मीडिया को किस प्रकार प्रभावित किया है और इस चुनौतीपूर्ण आपातस्थिति में मीडिया द्वारा आमजन तक सूचनाएं कैसे पहुंचाई जा रही हैं, इन विषयों को लेकर भी व्यापक चर्चा-परिचर्चा हुई. इस वेबिनार की ख़ास पेशकश रही 14-21 साल के छात्रों की सक्रिय भागीदारी जिसे अमली जामा पहुँचाने में युनिसेफ़ ने अहम योगदान दिया. दूसरे दिन आयोजित चौथा तकनीकी सत्र इन बच्चों व युवाओं के नाम रहा जिसमें इन्होंने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में न्यू मीडिया की भूमिका, वोकल फ़ॉर लोकल, प्रेस की स्वतंत्रता, पब्लिक मीडिया की ज़रूरत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर प्रभावी ढंग से अपने विचार रखे. पटना के डॉन बॉस्को स्कूल के 10वीं कक्षा के छात्र स्नेहल कुमार ने सबसे युवा प्रतिभागी के तौर पर इस कार्यक्रम में भाग लिया.

एमिटी परिवारगण व गणमान्य अतिथियों का संबोधन
आयोजन समिति की कोऑर्डिनेटर सह एमिटी स्कूल ऑफ़ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी पटना की प्रोफ़ेसर श्वेता प्रिया ने अपने स्वागत संबोधन में देश-विदेश से भाग ले रहे सभी एक्सपर्ट्स और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के रूपरेखा पर प्रकाश डाला. एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर टी. आर. वेकटेश ने अपने उद्घाटन भाषण में सभी प्रतिभागियों से इस कार्यक्रम का भरपूर लाभ लेने व इसे सफल बनाने का आह्वान किया. तत्पश्चात, एमिटी यूनिवर्सिटी, पटना कैंपस के चांसलर यू. रामचंद्रन ने अपने संबोधन में इस वेबिनार के विभिन्न पक्षों पर संक्षिप्त चर्चा की और आयोजन के अपेक्षित फलाफल की उम्मीद जताई. एमिटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अतुल चौहान ने मौजूदा दौर में इस तरह के आयोजन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि इस तरह की चर्चा-परिचर्चा से हमें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु एक दिशा मिलेगी. डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन, कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका के डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने अपने मुख्य भाषण में प्रभावी एवं सफल संवाद के लिए सांस्कृतिक समझ के महत्व पर ज़ोर देते हुए रचनात्मक प्रस्तुति को माध्यम बनाने की वकालत की. उन्होंने बिहार की एक 9 वर्षीया लड़की चांदनी का उदहारण देते हुए कहा कि लड़कियों की शिक्षा को लेकर कैसे उसने अपने लोक गीत की प्रस्तुति से आम लोगों को जागरूक करने का काम किया. वहीं डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन, सेंट्रल मिशिगन यूनिवर्सिटी, अमेरिका के प्रोफ़ेसर माइकल जे. पापा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सोशल मीडिया का बख़ूबी इस्तेमाल कर लड़कियां-महिलाएं सामाजिक बदलाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं.


युनिसेफ़ इंडिया की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी एंड पार्टनरशिप चीफ़ ज़ाफरीन चौधरी ने अपने संबोधन में कोविड महामारी के इस मुश्किल दौर को एक अवसर के रूप में देखने की वकालत करते हुए कहा कि मीडिया ने कोरोना काल में बेहद प्रशंसनीय काम किया है. बच्चों, किशोर-किशोरियों व युवाओं के हितों की रक्षा एवं उनके सशक्तिकरण के लिए युनिसेफ़ मीडिया और अकादमिक जगत के साथ मिलकर काम करने को कृतसंकल्पित है. युनिसेफ़ बिहार की कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट निपुण गुप्ता ने कहा कि बच्चों और किशोर-किशोरियों की राय काफ़ी अहमियत रखती है और इस आयोजन के माध्यम से हम सबको उन्हें सुनने-समझने का मौक़ा मिलेगा.

सफल प्रतिभागियों को किया गया पुरस्कृत
बेहतरीन पेपर और प्रस्तुति के आधार पर प्रतिभागियों को दो अलग-अलग श्रेणियों (सीनियर व जूनियर) में पुरस्कृत किया गया. पहली कैटेगरी में एकता सिन्हा, राखी गौरवम और डॉ. जे. एम. बदियानी को क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त हुआ. वहीं जूनियर कैटेगरी में तिशीनीत कौर, शशांक शेखर और साक्षी दीप को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ. युनिसेफ़ बिहार चीफ़ असद्दुर रहमान ने सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया. समापन सत्र में एमिटी यूनिवर्सिटी, पटना के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. विवेकानंद पांडे ने अपने विचार रखे अंत में, प्रोफ़ेसर श्वेता प्रिया ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी एक्सपर्ट्स और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन दिया.

Leave a Reply