बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन के धर्मगुरुओं ने बकरीद की मुबारकबाद देते हुए लोगों से की अपील

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पटना, 31 जुलाई: इस वर्ष बकरीद या ईद-अल-अज़हा ऐसे दौर में आया है, जब पूरी दुनियां कोविड-19 वायरस के चपेट में है। इस माहौल को देखते हुए विश्व के विभिन्न स्वास्थ्य संगठनें एवं सरकारें भी सुरक्षित तरीके से पर्व मनाने को लेकर दिशानिर्देश जारी कर रही हैं।

बिहार  इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन  (बी.आई.ऍफ़.सी.) के तत्वावधान में अलग-अलग धर्मगुरु जहाँ साथ आते हैं, उन्होंने भी इसके दिशानिर्देश जारी किये। हज़रत सैयद शाह शमीमुद्दीन अहमद मुनेमी, (खानका मुनेमिया) हाजी एस एम् सनाउल्लाह (इदारे शरिया) मौलाना अनिसुर रहमान (आल इंडिया मिल्ली काउन्सिल ) मो रिजवान अहमद (जमाते इस्लामी हिंद ) और अन्य सदस्यों ने बक़रीद की मुबारकबाद देते हुए जनता से सुरक्षित तरीके से, शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए त्यौहार मनाने की अपील की।

मो रिजवान अहमद, जमाते इस्लामी हिंद

बी.आई.ऍफ़.सी. के धर्मगुरुओं ने इस बात पर तवज्जो दी कि कोविड19 का प्रसार मुख्य रूप से मनुष्य से मनुष्यों में होता है लेकिन इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि इसका प्रसार मनुष्यों से पशुओं में भी हो सकता है, ख़ासतौर से कोविड से संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से।

मौलाना अनिसुर रहमान,आल इंडिया मिल्ली काउन्सिल

इस बीमारी से होने वाले घातक स्वास्थ्य परिणाम, असमय मृत्यु, अनावश्यक खर्च ओर परेशानी से बचने के लिए उन्होंने सलाह दी कि ईद-अल-  अज़हा पर जानवरों की परंपरागत कुर्बानी देते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। जैसा कि बार-बार कहा जाता है, उसे मानते हुए, घर पर कुर्बानी देने से परहेज़ करें। साबुन से बार-बार हाथ धोएं और मास्क पहनें तथा ये बातें बच्चों को भी सिखाएं।

भीड़भाड़ से संक्रमण तेजी से फैलने का ख़तरा रहता है इसलिए भीड़ कम से कम लगायें। जैसा की कुर्बानी के मामले में हमेशा हिदायत की जाती  है, हाथ और औजारों की साफ़-सफाई सुनिश्चित करें और साबुन से अच्छे से हाथ धोएं। बीमार लग रहे जानवरों की कुर्बानी भी ठीक नहीं हैं। अगर पशु बीमार लग रहे हों, तो उनकी कुर्बानी ना दें। इसके अलावा पशुओं की खरीद के मसले पर भी उन्होंने ध्यान दिलाया की जानवरों को विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदें।

हाजी एस एम् सनाउल्लाह, इदारे शरिया

कुर्बानी और मांस के बंटवारे के वक्त भी एहतियात बरतना जरूरी है। आस पास की मस्जिद या दूसरे किसी संगठन की सहायता लें ताकि आस—पड़ोस में अनावश्यक भीड़ भाड़ ना हो। हाथों की सफाई, मास्क पहन, शारीरिक दूरी बनाये रखने का पूरे क्रम (कुर्बानी के दौरान, उचित हिस्से करने, फ्रिज इत्यादि में सुरक्षित रखने ओर बांटने) में पूरा-पूरा ध्यान रखें। मीट को साफ़ कर, ऊँचे तापमान पर देर तक पकाने के बाद ही, साबुन से हाथ धोकर खाएँ।

उलेमाओं ने बिहार इंटरफेथफोरम (बी.आई.एफ़.सी.) के मंच के जरिये कहा कि थोड़ी सी सावधानियों के जरिये हम खुद भी सुरक्षित रहेंगे और दूसरों को बीमारी से बचाते हुए त्यौहार मनाएंगे। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और वंचित परिवारों की विशेष देखभाल करे। सभी की ख़ुशहाली के लिए घर पर ही नमाज़ पढ़े दुआ करे और आपसी सौहार्द बनाए रखें।

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