पटना में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाता बीवाईसीआर

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मोनू कुमार, पटना: वैसे तो भारत में कहा जाता है कि बच्चे भगवान के रूप होते हैं। लेकिन रोजमर्रा की ज़िंदगी में हमारे आसपास ऐसी कई घटनाएं होती हैं जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती हैं। स्कूल में फीस के लिए बच्चों को वर्ग खड़ा करना हो या घर में पढ़ाई करने के लिए माता-पिता द्वारा बच्चों को पड़ने वाली मार हो। होटलों और ढ़ाबों में काम करने वाले बच्चे हो या हाथ में किताब की जगह फल की टोकरी। ये सभी बच्चों के अधिकारों का हनन हैं। संयुक्त राष्ट्र के कंवेंशन आॅन राइट्स आॅफ चाइल्ड के अनुसार विश्व के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा, पोषक भोजन, खेलने, आराम करने आदि का पूरा अधिकार हैं। साथ ही बच्चों की खरीद-बिक्री, उनसे जबरदस्ती कार्य करवाना, उनका मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण भी इस कंवेंशन के नियमों के विरूद्ध हैं।

बच्चों को उनके इन अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए पटना में कार्य कर रही है 16 वर्षीय प्रियास्वारा भारती। वे अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर “बिहार यूथ फॉर चाइल्ड राइट्स” के नाम से एक संस्था चलाती है।

बिहार यूथ फॉर चाइल्ड राइट्स

“द बेटर बिहार” से बात करते हुए प्रियास्वारा भारती ने बताया कि बिहार यूथ फॉर चाइल्ड राइट्स बच्चों द्वारा चलाई जाने वाली एक संस्था है। इसकी शुरूआत वर्ष 2018 में हुई थी। इसका उद्देश्य बच्चों, माता-पिता  और अन्य लोगों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। आगे उन्होंने कहा कि, “देश में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कानून है लेकिन बच्चों को इसकी कोई जानकारी नहीं हैं। जानकारी के अभाव में उनके साथ जो गलत होता है वे उसे सहते रहते हैं और कुछ नहीं कर पाते। बच्चे अपने अधिकारों को जानें और उसका सही तरीके से इस्तेमाल करें, यही हमारा उद्देश्य हैं।”

इसमें उनकी मदद करते हैं उनके 20 से भी ज्यादा साथी। जिनमें कुछ के नाम हैं – रवि रौशन टुड्डू, प्रियांतरा भारती, अनिमेश, आदित्य राज, गौरा राज नंदन, अभिनंदन गोपाल, सुदिक्षा, विशिष्ठ राज आनंद आदि।

अभी तक के कार्य

बिहार यूथ फॉर चाइल्ड राइट्स समय-समय पर बच्चों के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में बताया जाता है। इन कार्यक्रमों में बच्चों के माता-पिता को भी आमंत्रित किया जाता है ताकि यदि उनके बच्चों के अधिकारों का हनन हो तो वे उनकी मदद कर सकें। भारती अपने साथियों के साथ मिलकर सामाजिक मुद्दों पर डॉक्यूमेंटरी और शॉर्ट फिल्में भी बनाती हैं। दहेज, बाल अधिकारों और अन्य मुद्दों पर इन लोगों ने 20 फिल्में बनाई हैं। 9वें नेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दौरान इन लोगों के द्वारा बनाई गई फिल्म “जिलोटोलॉजी- अ साइंस आॅफ लाफ्टर” को जूरी स्पेशल मेंशन अवार्ड मिला था।

गो ब्लू मूवमेंट

पिछले साल विश्व बाल दिवस  सप्ताह  के  दौरान बिहार यूथ फॉर चाइल्ड राइट्स ने गो ब्लू मूवमेंट की शुरूआत की थी। 18 नवंबर को बीवाईसीआर ने शहर के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के साथ एक कार्यक्रम किया था। इसमें सभी ने निर्णय लिया था कि बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी अपने घर के छत पर ब्लू रंग का झंडा या बैलून लगाएंगे और सोशल मीडिया पर इसके बारे लिखेंगे।

चुनौतियां

बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा प्रियास्वारा ने इसी साल बारहवीं की परीक्षा दी है। चुनौतियों का जिक्र करते हुए भारती ने कहा कि, “कई बार ऐसा होता है कि लोग इस बारे में बात नहीं करना चाहते। उन्हें समझाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा छोटे बच्चे अपने अधिकारों के बारे में देर से समझते हैं। साथ ही हमें कहीं से फंड नहीं मिलता। इसलिए हमें जब भी कोई कार्यक्रम करना होता है तो हम सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स या दूसरे संस्थानों से मदद लेते हैं।”

यूनिसेफ की निपुर्ण गुप्ता करती है सहयोग

प्रियास्वारा ने बातचीत के दौरान यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुर्ण गुप्ता को अपना मेंटर बताया। ‘द बेटर बिहार’ से बात करते हुए निपुर्ण गुप्ता ने कहा कि, “बीवाईसीआर के सभी बच्चे अपने कार्य खुद में मंत्रणा करके करते हैं। वे बहुत जिम्मेदारी के साथ कोई वर्कशॉप या प्रोग्राम आयोजित करते हैं. उन लोगो ने मंत्रियों के सामने अपने विचार रखे हैं। सभी बच्चे होनहार है और बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्हें जब भी जरुरत पड़ती हैं तो मैं उनका मार्गदर्शन करती हूँ और सहयोग करती हूँ।”

कोरोना काल में काम

पूरे  देश में कोरोना वायरस महामारी के कारण लाॅकडाउन लागू है। ऐसे समय में बीवाईसीआर आनलाईन माध्यमों से जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है। इसी क्रम में “लॉकडाउन एंड चिल्ड्रेन” नाम से वेबिनार सीरीज की शुरूआत की गई है। जिसका पहला वेबिनार 14 मई को हुआ। इसमें यूनिसेफ बिहार यूनिट की कम्युनिकेशन एक्सपर्ट निपुर्ण गुप्ता मुख्य वक्ता थी।

प्रियास्वारा भारती की निजी जिंदगी

भारती मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले की रहने वाली है। 2009 में पिता के इलाज के लिए पूरा परिवार पटना आया और फिर यही रहने का फैसला किया। चार भाई – बहनों में दूसरी सबसे बड़ी है भारती बचपन से ही एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटिज में सक्रिय रूप से भाग लेती रही है। उन्होंने कहा कि, “मैं जब स्कूल में थी तब मैं किलकारी से जुड़ी। वहां यूनिसेफ के द्वारा बाल अधिकारों के बारे में कई वर्कशॉप होते रहते थे। उसी से मैंने बच्चों के अधिकारों के बारे में जाना। अपने आस-पास बाल अधिकारों के हो रहे हनन को देख कर ही मेरे मन में बीवाईसीआर का विचार आया।”

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