जब बात मैडम टूसाड के म्यूजियम में लगे पुतलों की चली तो याद आया की हाल ही में दक्षिण भारतीय फिल्मों के जाने माने नाम महेश बाबु ने अपनी सिंगापुर म्यूजियम में लगी प्रतिमा का अनावरण किया था। ये पुतला 2018 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म “भारत एने नेनू” की भारी सफलता के बाद लगाया गया था। 200 करोड़ से ऊपर की कमाई कर चुकी ये फिल्म अब हिंदी में भी “डैशिंग सीएम भारत” नाम से आ चुकी है।

हाल ही में इस पोलिटिकल थ्रिलर का जिक्र साल 2018 में अविश्वास प्रस्ताव की बहस के दौरान गुंटूर से सांसद गल्ला जयदेव ने संसद में किया था। गल्ला इस फिल्म के जरिए वो नहीं कह रहे थे, जिस वजह से आजकल ये फिल्म सुर्ख़ियों में है, वो वादों को पूरा करने पर जोर दे रहे थे। लगभग 75 करोड़ रुपये में बनी ये फिल्म एक नौजवान के सीएम बनने की कहानी है। अचानक एक दिन अपने पिता की मौत के बाद उसे कुर्सी संभालनी पड़ती है और फिर उसे अपनी ही पार्टी के भ्रष्ट नेताओं से मुकाबला करना पड़ता है।

सीएम बनने के बाद भारत अपनी जिम्मेदारियों को सिर्फ वोट पाने के इरादे से नहीं, बल्कि जनता की भलाई के इरादे से पूरा करना शुरू करता है। शिक्षा और ट्रैफिक में वो कई बदलाव करता है और अपने राज्य की काया पलट देता है। अपने काम के दौरान उसे पार्टी के अंदर और विपक्ष से कैसे विरोधों का सामना करना पड़ता है, ये फिल्म उन्हीं को दर्शाती है। फिल्म के नायक की माँ का कहा एक वाक्य फिल्म को कई जगह दिशा देता नजर आता है।

फिल्म इस बात पर जोर देती है कि “कोई शख्स वादे को पूरा नहीं करता तो उसे खुद को इंसान कहने का अधिकार नहीं है”। अभी जिन वजहों से ये फिल्म चर्चा में है, उसका कारण फिल्म में दिखाए गए ट्रैफिक कानूनों में बदलाव हैं। मुख्यमंत्री बनते ही भारत ट्रैफिक पुलिस विभाग की बैठक बुलाता है और पूछता है कि ट्रैफिक की व्यवस्था में सुधार के लिए वो क्या कर रहे हैं? उनके काम से असंतुष्ट भारत ट्रैफिक जुर्माने अप्रत्याशित रूप से बढ़ा देता है।

जिसके लिए सौ-दो सौ का जुर्माना होता है, उन सभी मामलों पर वो हज़ारों का जुर्माना लगाना शुरू कर देता है। मसलन गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल पर बात करने से 25 हज़ार का जुर्माना लागू हो जाता है। हाल में (एक सितम्बर से) जो नए जुर्माने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर लागू हुए हैं, वो काफी कुछ इस फिल्म के दृश्य से मिलते जुलते हैं। जाहिर है लोगों ने फिल्म को अचानक याद करना शुरू कर दिया है। अलग अलग दृश्य आज सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

थोड़े समय पहले तक सुना जाता था कि फ़िल्में समाज का आइना होती हैं। इस हिसाब से फिल्मों में वो दिखाया जाना चाहिए था जो समाज में होता है। इस बार मामला कुछ उल्टा है, फिल्मों में जो दिखाया जा रहा था वो अब समाज में होने लगा है। बदलाव शायद ऐसे ही आते हैं, चुप-चाप और अचानक!

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