करीब 18 साल की उम्र में येलम्मा की शादी एक फूल बेचने वाले से करवा दी गई थी. लगभग 22 साल की येलम्मा, अब अपने दो साल के बेटे के साथ रहती हैं . वो बंगलौर की सड़कों पर ऑटो रिक्शा चलाती हैं . अपने एक रिश्तेदार की मदद से उन्होंने ऑटो चलाना सीखा था . फिर एक मैकेनिक की मदद से उन्हें एक ऑटो किराये पर मिल गया . दिन के करीब 700-800 कमाने वाली येलम्मा दिन में करीब 400 से 500 रुपये बचा पाती हैं . उनका ज्यादातर खर्च गाड़ी के तेल और किराये का है .

लेकिन उनकी कमाई का ये जरिया, उनके दिन भर का काम उनकी असली पहचान नहीं है . दरसल वो एक सवारी से दूसरी सवारी मिलने के बीच के समय में अपना असली काम कर रही होती हैं . वो पढाई करती हैं . अपने दिन का सारा खाली वक्त वो अलग अलग पत्रिकाएं और किताबें पढने में लगाती हैं . वो आई.ए.एस. की परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं . सुबह के छह बजे से शाम आठ बजे तक ऑटो चलाने के बाद भी येलम्मा पढ़ती है .

उनके बारे में “The Hindu” अखबार में छपा था . इसके बाद कुछ लोग उनकी मदद के लिए भी शायद सामने आये होंगे . आम तौर पर बाकी के पुरुष ऑटो ड्राईवर मानते हैं कि येलम्मा उनका काम छीन ले जाती है . वो लोग उसे स्टैंड से भगा देना चाहते हैं . लेकिन येलम्मा बताती हैं कि सवारियों का बर्ताव अक्सर उनके प्रति बहुत अच्छा होता है . जब वो उन्हें पढाई करते देखते हैं तो अक्सर मीटर से दस बीस रुपये ज्यादा ही देकर जाते हैं .

अगर काम में आने वाली मुश्किलों या रुकावटों से दिक्कत हो रही हो तो एक बार येलम्मा को भी याद कीजियेगा . और सोच लीजियेगा कि आपका चुना हुआ काम अगर इतना ही आसान होता तो आपसे पहले ही कई लोग उसे कर के निपटा चुके होते .

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